बीबीएमबी द्वारा पौंग बांध से पानी छोड़ने के मामले में नुकसान पर दर्ज FIR दर्ज
शुक्रवार को इंदौरा विधायक मलेंद्र राजन के लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के अंतर्गत कांगड़ा जिला में पौंग डैम से बार-बार अत्यधिक पानी छोड़े जाने और उससे होने वाले भारी नुकसान का मुद्दा उठा। मलेंद्र राजन ने कहा कि पौंग डैम से अचानक छोड़े गए पानी से इस बार उनकी 13 पंचायतें प्रभावित हुई हैं। शुक्रवार सुबह ही 100 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया और 42 स्कूल बंद पड़े हैं। धान की फसल बर्बाद हो गई है, कई गोशालाएं बह गई हैं, चार पक्के और पांच कच्चे मकान ढह गए हैं और कई एकड़ जमीन तालाब में बदल गई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित लोगों को बीबीएमबी से पूरा मुआवजा दिलाया जाए, उच्च स्तरीय संयुक्त कमेटी क्षेत्र का मुआयना करे और इस इलाके को विशेष आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया जाए।
मलेंद्र राजन के लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर देते हुए सीएम ने कहा कि इस लापरवाही पर राज्य सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड के खिलाफ सख्ती की है। संसारपुर टैरेस में बीबीएमबी प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और भविष्य में भी इसी तरह की लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। हर साल मानसून के दौरान पौंग बांध से अचानक अधिक पानी छोड़ा जाता है। इससे निचले इलाकों में तबाही हो रही है। उन्होंने कहा कि बांध सुरक्षा पर अब अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। सुक्खू ने कहा कि पौंग बांध से पानी छोड़े जाने के कारण इस बार फतेहपुर और इंदौरा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। फतेहपुर में करीब 60 हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें नष्ट हुईं और 23 परिवारों को रेस्क्यू करना पड़ा।
वहीं, इंदौरा क्षेत्र में लगभग 100 हेक्टेयर कृषि भूमि को नुकसान हुआ है। बरसात के मौसम में पौंग बांध का पानी हमेशा तबाही लेकर आता है। बीबीएमबी की ओर से इसकी भरपाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि पानी भी हिमाचल का है और सबसे ज्यादा विस्थापित भी यहीं के लोग ही हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर डैम सिक्योरिटी कमेटी बनी हुई है और उसके दिशा-निर्देश स्पष्ट हैं, लेकिन बीबीएमबी इसकी अनुपालना नहीं कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने वक्तव्य में पौंग डैम से हो रहे नुकसान पर बात करते हुए कहा जब भी डैम से पानी छोड़ा जाता है, तब फतेहपुर और इंदौरा में बहुत अधिक नुक़सान होता है। जब बात हमारे अधिकार की आती है, तब हमें कुछ नहीं मिलता। हमने विभाग के माध्यम से FIR दर्ज करवाई है और कहा है कि नुक़सान की भरपाई BBMB द्वारा की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हिमाचल को 4300 करोड़ रुपये का एरियर मिलना चाहिए। उसमें भी अड़चनें डाली जा रही हैं। पानी के कारण हमारे लोग विस्थापित हुए हैं। जब हिमाचल के अधिकारों की बात आती है तो आँखें मूँद ली जाती है।


