मणिमहेश यात्रा: टूट गई इतिहास में पहली बार ‘डल तोड़ने’ की पवित्र रस्म | हिमाचल प्रदेश के जिला चम्बा में इस समय प्रकृति का जो कहर बरस रहा है, उसने न केवल जन-जीवन को अस्त-व्यस्त किया है, बल्कि सदियों से चली आ रही अटूट आस्था और परंपराओं को भी खंडित कर दिया है। इसका सबसे बड़ा और दुखद उदाहरण श्री मणिमहेश यात्रा में देखने को मिला, जहां इतिहास में पहली बार ‘डल तोड़ने’ की पवित्र रस्म पूरी नहीं हो सकी। हर साल की तरह इस बार भी राधा अष्टमी के पावन अवसर पर परंपरा के अनुसार संचुई गांव के शिव चेले (भगवान शिव के विशेष उपासक) पवित्र मणिमहेश डल झील को तोड़ने के लिए अपनी यात्रा पर निकले थे। उनकी आस्था और हौसले बुलंद थे, लेकिन प्रकृति के प्रकोप के आगे उन्हें झुकना पड़ा। जैसे ही शिव चेलों का जत्था यात्रा के मुख्य पड़ाव हड़सर पहुंचा तो उन्हें वहां से आगे मणिमहेश की ओर जाने वाला पूरा रास्ता भूस्खलन और बाढ़ के कारण पूरी तरह से तबाह हो चुका था। जगह-जगह विशालकाय पत्थर और मलबा पड़ा था, और लगातार हो रही बारिश के कारण आगे बढ़ना जान जोखिम में डालने जैसा था। विकट परिस्थितियों को देखते हुए शिव चेलों ने यह निर्णय लिया कि वे आगे नहीं जा सकते, और वे वहीं से वापस भरमौर लौट गए।
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