अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025:
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस हर वर्ष 8 सितंबर को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह दर्शाना है कि साक्षरता केवल मानव का मौलिक अधिकार ही नहीं, बल्कि सतत विकास, सशक्तिकरण और समानता की आधारशिला भी है।
इतिहास और उद्देश्य
इसे यूनेस्को (UNESCO) ने 26 अक्टूबर 1966 को स्थापित किया था और पहली बार 1967 में मनाया गया।
2025 की थीम
इस वर्ष का विषय है “डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना”।
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि साक्षरता अब केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डिजिटल पहुंच, सुरक्षित संवाद, आलोचनात्मक मूल्यांकन और डिजिटल दुनिया में सार्थक भागीदारी भी शामिल है।
यूनेस्को का कहना है कि डिजिटलाइजेशन अवसरों के साथ-साथ चुनौतियां भी लाता है, इसलिए सबको समावेशी और समान पहुंच दिलाना जरूरी है।
वैश्विक आयोजन
यूनेस्को का वैश्विक समारोह पेरिस (फ्रांस) में 8 सितंबर 2025 को आयोजित होगा।
इसमें विभिन्न वक्ताओं की पैनल चर्चा होगी और यूनेस्को इंटरनेशनल लिटरेसी प्राइज प्रदान किए जाएंगे।
मुख्य मुद्दे होंगे:
साक्षरता पर डिजिटल परिवर्तन का प्रभाव
जीवनभर सीखने की व्यवस्था को सशक्त बनाना
साक्षरता पहल में योगदान करने वालों का सम्मान
भविष्य की डिजिटल समाज में साक्षरता की भूमिका
महत्व
आज भी विश्वभर में करोड़ों लोग पढ़ना-लिखना नहीं जानते। ऐसे में यह दिवस बेहद महत्वपूर्ण है।
डिजिटल युग ने शिक्षा के नए अवसर दिए हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और डिजिटल कौशल की असमानता से कई लोग पीछे भी छूट रहे हैं।
अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2025 हमें यह संदेश देता है कि हमें डिजिटल साक्षरता अपनानी होगी, समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना होगा और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना होगा।


